(मेरी बेटी के जन्म की कहानी)

मंगलवार की वो सुबह…
आसमान में हल्की सी नीली आभा थी, मानो सूरज भी किसी विशेष क्षण का साक्षी बनने की तैयारी में हो। अस्पताल के गलियारे में हल्की ठंडक और एक अनकही उम्मीद तैर रही थी।
लेकिन मेरे दिल में उस दिन कुछ अलग ही भाव था… एक गहरा विश्वास, एक अजीब सी शांति।
दरअसल, उस दिन की शुरुआत ही कुछ अलौकिक थी।
सुबह के चार बजे, नींद और जाग के बीच की उस शांत अवस्था में मुझे देवी माँ के दर्शन हुए।
वो स्वप्न इतना स्पष्ट और दिव्य था कि मानो देवी माँ ने आशीर्वाद देकर कहा हो —
“बेटी आ रही है… तुम्हारे घर खुशियों की नन्ही कली खिलने वाली है।”
मैं उठकर बैठ गया। मन में एक अनजानी सी रोशनी जल उठी।
तभी मैंने खुद से कहा —
“आज मेरे घर पुत्री का आगमन होगा… देवी माँ खुद संकेत दे गई हैं।”
दिन जैसे-जैसे आगे बढ़ा, अस्पताल की दीवारों के बीच हलचल बढ़ती गई। परिवारजन उत्साहित थे, डॉक्टर अपनी तैयारी में जुटे थे। पर मेरे भीतर एक अद्भुत शांति थी — जैसे किसी ने पहले से ही बता दिया हो कि सब कुछ शुभ होने वाला है।
थोड़ी ही देर में, ऑपरेशन थिएटर के भीतर से एक नन्ही सी आवाज़ गूंजी… वो पहली रोने की आवाज़ —
वो कोई साधारण आवाज़ नहीं थी, वो जैसे मेरे जीवन की नई शुरुआत की धुन थी।
दरवाज़ा खुला। नर्स ने मुस्कुराते हुए कहा,“बधाई हो… बेटी हुई है।”
और फिर… मेरी बाहों में आई नन्ही शानविका — गुलाबी सी, कोमल सी, जैसे किसी भोर की पहली किरण धरती पर उतर आई हो।
उसके नन्हे से हाथ ने जैसे ही मेरी उंगली को थामा, मेरे दिल में वही देवी माँ का स्वर गूंज उठा…“लो, तुम्हारी बेटी आ गई है…”
मेरी आंखों से आंसू बह निकले — श्रद्धा के, कृतज्ञता के, और उस खुशी के जो शब्दों में समा नहीं सकती।
उस क्षण मैंने महसूस किया कि सिर्फ़ एक बच्ची का जन्म नहीं हुआ…
बल्कि मेरे भीतर भी एक पिता का जन्म हुआ।
परिवार में जैसे त्योहार उतर आया। दादी की आंखों में गर्व, माँ के चेहरे पर आशीर्वाद की शांति, और सभी के हृदय में अपार आनंद।
हर कोई उस नन्ही परी को देखने के लिए उमड़ा हुआ था — मानो देवी माँ ने स्वयं हमारे घर अपनी एक झलक भेज दी हो।
वो मंगलवार…
वो सुबह चार बजे का सपना…
वो पहली रोने की आवाज़…
वो सब कुछ आज भी मेरे दिल में उतनी ही स्पष्टता से दर्ज है जितनी उस दिन थी।
क्योंकि उसी दिन, मेरी ज़िंदगी में शानविका के रूप में एक नन्ही सी रोशनी आई — जो आज भी मेरी हर सुबह को उजाला देती है


