अजय ब्लॉग-अनुभव और अभिव्यक्ति

“अनुभव, विचार और कहानियों का संगम”

🌸 “आई लव यू पापा” — एक छोटी सी पर्ची, बड़े एहसास

शाम का समय था। रोज़ की तरह मैं अपने क्लिनिक से लौटकर घर आया। थका हुआ शरीर, दिनभर की भागदौड़, मरीजों की चिंता — सब साथ में लिए। जैसे ही घर में कदम रखा, मेरी नज़र अचानक मेरी 5 साल की बेटी गिन्नी पर पड़ी।

वो एक कोने में चुपचाप बैठी थी और मेरे पर्स में कुछ कर रही थी।
मैंने हैरानी से सोचा — “गिन्नी तो कभी पैसों के पास भी नहीं जाती, आखिर पर्स में क्या कर रही है?”

मैं धीरे से पास गया और पूछा —
“गिन्नी, पापा का पर्स में क्या कर रही हो बेटा?”

वो झट से बोली — “कुछ नहीं पापा…”
चेहरे पर मासूमियत और आँखों में हल्की-सी झिझक थी।

मैं मुस्कुराया लेकिन प्यार से समझाया —
“बेटा, पर्स को मत छुआ करो। मैं रोज़ मरीजों को देखने जाता हूँ, कई बार बिना हाथ धोए पर्स छू लेता हूँ। नोट भी साफ नहीं होते। इससे बीमारी लग सकती है।”

गिन्नी ने गंभीरता से सिर हिलाया —
“ठीक है पापा…”
और फिर अपनी गुड़ियों की दुनिया में लौट गई।

दिन यूं ही बीत गया।
शाम को किसी ज़रूरी काम के लिए मैंने पर्स खोला… तो एक छोटा-सा मुड़ा-तुड़ा कागज़ नज़र आया।

थोड़ा हैरान होकर उसे निकाला और खोला —
अगले ही पल मेरी आँखें नम हो गईं।
उसमें नन्हे, टेढ़े-मेढ़े अक्षरों में लिखा था —

✨ “I Love You Papa” ✨

बस… उस पल जैसे समय ठहर गया।
दिनभर की थकान, काम का तनाव, सब कुछ एक ही झटके में गायब हो गया।
उस कागज़ के टुकड़े में न कोई हीरे थे, न सोना… लेकिन उसमें एक नन्ही बेटी का सच्चा, निश्छल और गहरा प्यार छिपा था।

मैंने पर्ची को सीने से लगाया और मन ही मन कहा —
“बेटा, तू नहीं जानती… तेरे इन तीन शब्दों ने मुझे आज दुनिया का सबसे अमीर इंसान बना दिया है।”



💖 समापन:

कभी-कभी ज़िंदगी की सबसे बड़ी खुशियाँ बड़े तोहफों में नहीं, बल्कि एक छोटे से “आई लव यू पापा” में छिपी होती हैं।
यह भावनाएँ समय के साथ पुरानी नहीं होतीं — बल्कि हमारे दिल में हमेशा के लिए एक गर्माहट भरी याद बनकर बस जाती हैं।

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