सुबह के आठ बजे रवि अपनी पुरानी कार में ऑफिस की ओर निकलता है। गाड़ी कोई बहुत शानदार नहीं, लेकिन उसे चलाते समय उसके चेहरे पर एक अजीब-सी गंभीरता होती है — जैसे हर मोड़ के साथ कोई नया विचार उसके मन में दस्तक दे रहा हो।
रवि सरकारी विभाग में एक अधिकारी है। न बहुत बड़ा, न बहुत छोटा।
लोग उसे “साहब” कहकर संबोधित करते हैं, लेकिन वह जानता है — ये कुर्सी उतनी ताकतवर नहीं जितनी दिखती है। ऊपर के अफसरों के आदेश, नीचे के कर्मचारियों की उम्मीदें… और बीच में वह — एक दबे स्वर वाला इंसान जो सही और गलत के बीच रोज़ फँसा रहता है।
युवा उम्र में उसने सपना देखा था — एक दिन वो बड़ा अधिकारी बनेगा, लोगों की भीड़ में उसका नाम होगा, सम्मान और प्रभाव दोनों उसके कदमों में होंगे। लेकिन ज़िंदगी का रास्ता वैसा सीधा नहीं निकला। मेहनत की, परीक्षा दी, नौकरी मिली… मगर ऊँचाइयाँ उतनी नहीं मिलीं जितनी उसने सपनों में गढ़ी थीं।
ऑफिस पहुँचते ही फ़ाइलों का ढेर उसका इंतज़ार करता है। कभी किसी के प्रमोशन की फाइल, कभी किसी की शिकायत, तो कभी ऊपर से आया हुआ दबाव। वो आदेशों पर हस्ताक्षर तो करता है, लेकिन कई बार उसके भीतर से आवाज़ आती है —
“क्या मैं अपने सिद्धांतों के साथ खड़ा हूँ या हालात के सामने झुक गया हूँ?”
कई बार बॉस के सामने उसकी बातें दब जाती हैं। वो जानता है कि कई फैसले गलत हैं, लेकिन विरोध करने की हिम्मत जुटा नहीं पाता। कुर्सी पर बैठा उसका चेहरा गंभीर होता है, पर भीतर गहरी बेचैनी होती है।
शाम को कार में लौटते हुए वो अक्सर शीशे में अपना चेहरा देखता —
“क्या मैं वो बन रहा हूँ जो मैं बनना चाहता था?”
“बड़ा अधिकारी बनना था… पर क्या मैंने बड़ा इंसान बनने की कोशिश की?”
रात में वह छत पर टहलते हुए आसमान को निहारता।
सपने अब भी वही हैं — एक दिन कुछ बड़ा करेगा, अपने परिवार को वो ज़िंदगी देगा जिसकी उसने कल्पना की थी।
लेकिन अब उन सपनों के साथ एक गहरी समझ भी जुड़ गई है — कि बड़ा बनना सिर्फ कुर्सी का मामला नहीं… दिल और हिम्मत का भी होता है।
उसका जीवन न पूरी तरह सफल था, न असफल। वो उन करोड़ों लोगों जैसा था जो मध्यम पदों पर बैठकर भी अंदर ही अंदर बड़े सपनों को सीने में सहेज कर रखते हैं…
जिनके भीतर हर दिन एक द्वंद्व चलता है — “जो हूँ” और “जो बनना चाहता हूँ” के बीच।
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यह कहानी न किसी नायक की है, न किसी विजेता की…
यह एक आम आदमी के असली भावनात्मक संघर्ष की कहानी है — जो बाहर से अधिकारी है, और अंदर से एक स्वप्नदर्शी।

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